तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा

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॥ पावन पाठ ॥

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है,

तुम्हारी रहमत से मेरे गुरुवर,

तुम्हारी रहमत से मेरे गुरुवर,

सभी की क़िस्मत चमक रही है,

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है......

तुम्हारे चरणों की धूल पाके,

भाग्य हमारे हैं यूँ ही जागे,

उसी की महिमा के गीत गाकर,

हमारी बग़िया महक रही है,

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है......

हमारी रग रग में तुम बसे हो,

तुम्हारे दर्शन की हमको चाहत,

हे राम मेरे हे मेरे गुरुवर,

दरश को आँखे तरस रही है,

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है.......

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है,

तुम्हारी रहमत से मेरे गुरु वर,

तुम्हारी रहमत से मेरे गुरुवर,

सभी की किस्मत चमक रही है,

तुम्हारी करुणा की प्रेम वर्षा,

सभी जनों पे बरस रही है......

राज कुमार राजपूत, इंद्रलोक कॉलोनी, बिजनौर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।