आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

आंखों से हम अंधे हो गए,

मुख में रहे ना दांत मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

कानो से हम बहरे हो गए,

मेरे घुटुअन आ गई बाय मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

कमा कमा मैंने माया जोड़ी,

मेरे कोढी रही ना पास मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

महल दुमाला मैंने बहुत बनाए,

मेरी द्वारे पे पटकी खाट मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

बहु मेरी भोजन बनाती,

उसके माथे में सरवट चार मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

बाहर से मेरा बेटा आया,

माता कैसे पड़ी हो उदास मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

बेटा रे बहू को समझाय लें,

मेरी रोटी का कोई ना ख्याल मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

जैसा मिल जाय वैसा ही खा लें,

मैया अपनों बखत गुजार मेरे सांवरिया,

आया ऐसा बुढ़ापा मेरे सांवरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।