हरी का भजन कर प्यारी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हरी का भजन कर प्यारी उमरिया बीती जाती है....

कौन शुभ कर्म कराया मानुष तन पृथ्वी पर पाया,

फिरे माया के चक्कर में मौत नहीं याद आई है,

हरी का भजन कर प्यारी उमरिया बीती जाती है....

यह बचपन खेल में खोया जवानी नींद भर सोया,

बुढ़ापा देख कर रोया याद मन को सताती है,

हरी का भजन कर प्यारी उमरिया बीती जाती है....

कुटुंब परिवार जग सारा स्वपन सब देख जग सारा,

माया का ज्ञान विस्तारा नहीं यह संग जाती है,

हरी का भजन कर प्यारी उमरिया बीती जाती है....

हरि के चरण चित्र लागे जो भव से पार हो जावे,

वह ब्रह्मानंद मोक्ष पावे वेद बॉडी सुनाती है,

हरी का भजन कर प्यारी उमरिया बीती जाती है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।