जमाना कलयुग का आया

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॥ पावन पाठ ॥

बिगड़ गई फैशन में दुनिया जमाना कलयुग का आया,

जमाना कलयुग का आया जमाना बहुत बुरा आया,

बिगड़ गई फैशन में दुनिया जमाना कलयुग का आया......

आजकल की लड़की देखो जरा शर्म नहीं करती हैं,

डाल लिए बालों में छल्ला मचा रही गलियों में हल्ला,

बिगड़ गई फैशन में दुनिया.....

आजकल के लड़के देखो जरा शर्म नहीं करते हैं,

दवा लई दारू की पेटी देख रहे और उनकी बेटी,

बिगड़ गई फैशन में दुनिया.....

आजकल की बहुअल देखो जरा शर्म नहीं करती हैं,

डाल दिए कांधे पर पल्लू बना लिए देवर जेठ लल्लू,

बिगड़ गई फैशन में दुनिया.....

आजकल की सासुल देखो जरा शर्म नहीं करती है,

बना रही अटटा पे रोटी वह कर रही बहुओ की गोटी,

बिगड़ गई फैशन में दुनिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।