कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

पहले जन्म मोहे जल को दीजो,

कान्हा मोहे जमुना दी जो बनाए, कन्हैया मलमल नहावै रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

एक जन्म मोहे जल को दीजो,

कान्हा मोहे गैया दीजो बनाए, कन्हैया रोज चरावे रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

एक जन्म मोहे वृक्ष को दीजो,

कान्हा मोहे चंदा नदी जो बनाए, कन्हैया तिलक लगावे रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

एक जन्म मोहे मानुष को दीजो,

कान्हा मोहे राधा दीजो बनाए, कन्हैया ब्याह रचावे रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

एक जन्म मोहे पक्षी को दीजो,

कान्हा मोहे मोर दीजो बनाए, कन्हैया मुकुट सजावे रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

एक जन्म मोहे दूध को दीजो,

कान्हा मोहे माखन दीजो बनाए, कन्हैया भोग लगावे रे,

कान्हा मोहे ना चाहिए बैकुंठ, जन्म मोहे धरती पर दीजो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।