अखियां खोलो तो हरी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस आई,

देवउठनी ग्यारस आई शुभ मंगल ग्यारस आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथों में मेरे गंगाजल लोटा,

अखियां खोलो तो हरी तुमरे चरण दिलाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथ में मेरे चंदन कटोरी,

अखियां खोलो तो हरी मैं तो तिलक लगाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथ में मेरे फूलों की माला,

अखियां खोलो तो हरी मैं तो हार पहनाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथ में मेरे पीला पितांबर,

अखियां खोलो तो हरी मैं तुम्हें पहनाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथ में मेरे भोगों की थाली,

अखियां खोलो तो हरी मैं भोग लगाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

हाथ में मेरे ढोलक मजीरा,

जागो जागो रे हरी मैं तुम्हें जगाने आई,

अखियां खोलो तो हरी देवउठनी ग्यारस है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।