मोरवी मां रो रो कहे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक बार तो माता बनके देखो निष्ठुर सवारियां, मोरवी मां रो रो कहे......

क्या होती ह ममता, क्या रिश्ते होते है,

एक मां का दिल समझे क्या नाते होते है,

इस बात को तुम देवकी से पूछो सवारियां,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

मेरे लाल को मेने नज़ो आलम पाला,

वो वीर था छोटा कितना भोला भाला,

एएएए छलिए तेरी चाल को वो समझ नहीं पाया,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

मेरे लाल से कोई यूं लड़ नहीं सकता,

तू जानता था की युद्ध कर नही सकता,

तेरे सुदर्शन ने भी मना कर्दिया था सवारियां,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

ये सोच कर माता गुस्से में आगाई और श्राप देने को तैयार हो गई,

मेरे शीश के दानी बाबा ने खुद मां को रोक लिया,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

ओ मां इसे में ये वरदान दे दूंगा,

कलयुग मै में इसको अपना नाम दे दूंगा,

खाटू में मेरे नाम से ये पूजा जाएगा,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

ये खाटू वाला है वही शीश का दानी,

जिसको पूजते हैं कलयुग के नर नारी,

एक बार तो खाटू जाके देखो महिमा इसकी क्या,

मोरवी मां रो रो कहे, एक बार तो माता.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।