एक तेरे दीद की चाहत है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज :- हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर के तरह

( मेरा गोपाल गिरधारी जमाने से निराला है,

सांवरा है, रसीला है, न गोरा है ना काला है,

कभी सपनों में आ जाता, कभी रूहपोश हो जाता,

ये मनमोहन ने छलने का, निराला ढंग निकाला है,

वृंदावन के कण कण का मरम न जाने कोए,

जहां डाल डाल और पात पात में राधे राधे होए।। )

एक तेरे दीद की चाहत है बांसुरी वाले,

बेकरारों को तू, करार का मौका दे दे,

एक तेरे दीद की चाहत है.....

फूलों के हार की कुछ लाज तो रख ले कान्हा,

लाए उपहार का तू स्वाद तो चख ले कान्हा,

उभरते प्रेम को, इज़हार का मौका दे दे,

एक तेरे दीद की चाहत है......

ख्वाब लाखों के हैं दिलों में, खयाल दीद का है,

सवालियों के दिलों में भी, सवाल दीद का है,

अपने दर्शन, अपने सत्कार, का मौका दे दे,

एक तेरे दीद की चाहत है.....

चर्चा लाखों से सुनी है तेरे को उपकारों की,

भीख दे दर की हमें भी अपने दीदारो की,

राजू को भी जरा, दीदार का मौका दे दे,

एक तेरे दीद की चाहत है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।