शेरावाली माँ भवानी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली माँ भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी,

महिमा तुम्हारी ना जाये बखानी हे महाकाली माँ अम्बे रानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी……

मै तेरा बालक तू मेरी माता,

माँ बेटे का कितना पावन है नाता,

दर्शन की प्यासी बैरन ये अखियाँ,

बरसाए झर झर आँखों से पानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी…….

तुम बिन दिल की किसको सुनाये,

हो गये अपने भी अब पराये,

किस हाल में है तुम्हे क्या बताये,

तुमसे छुपी ना ये मेरी कहानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी……..

दर पे तुम्हारे जो भी है आया,

मुँह माँगा वर उसने तुमसे है पाया,

मेहर की निगाह हम पर भी डालो,

तुम्हारी हमारी है प्रीत पुरानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी…….

राजा हो या रंक भिखारी,

सब ही है माँ तेरे पुजारी,

राधा मंडल का है ये कहना,

“दिलबर” की हर बात हंसकर के मानी,

शेरावाली मां भवानी,

हे जग जननी माँ कल्याणी…….

सारे जहाँ में गुंजे जयकारे,

जय मइया जय मइया भक्त पुकारे,

धरती अम्बर में यही गूंज गूंजे,

है नव दुर्गा जगत महारानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी……

शेरावाली माँ भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी,

महिमा तुम्हारी ना जाये बखानी हे महाकाली माँ अम्बे रानी,

शेरावाली मां भवानी हे जग जननी माँ कल्याणी……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।