बाबा तू मुझको लगा ले गले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

कौन जाने तेरा दर मिले ना मिले

कौन जाने ये मौका मिले ना मिले......

एक तू एक मैं, एक चाहत तेरी,

एक तू एक मैं, एक चाहत तेरी,

इसके आगे है कोई नजारा नहीं,

इसके आगे है कोई नजारा नहीं,

तेरी भक्ति में बंध कर चला आया हूँ,

तेरी भक्ति में बंध कर चला आया हूँ,

कौन जाने कदम फिर चले ना चले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

कौन जाने तेरा दर मिले ना मिले

कौन जाने ये मौका मिले ना मिले.......

जब तलक चलती धड़कन, ये संसार है,

जब तलक चलती धड़कन, ये संसार है,

साँस थमते नजारा ये बेकार है,

साँस थमते नजारा ये बेकार है,

इस जुबा से जपू मैं नाम हर घड़ी,

कौन जाने ये लाल फिर हिले ना हिले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

कौन जाने तेरा दर मिले ना मिले

कौन जाने ये मौका मिले ना मिले.......

आखिरी तुमसे नरसी की विनती यही,

आखिरी तुमसे नरसी की विनती यही,

अपनी बाँहों में हमको उठा लीजिये,

अपनी करुणा से गुलशन खिला दो मेरा,

कौन जाने दुबारा खिले ना खिले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

मेरे बाबा तू मुझको लगा ले गले,

कौन जाने तेरा दर मिले ना मिले

कौन जाने ये मौका मिले ना मिले.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।