मुझको सम्भालो हे बालाजी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैं निर्बल हूँ मुझको भी,

बल दीजिये,

मेरी मुश्किलों को भी,

हल कीजिये,

जग की बलाओं से,

दुखों की हवाओं से,

मुझको बचा लो, हे बालाजी,

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

बड़ी दूर से आया हूँ, सालासर बाबा,

चरणों पर तुम्हारे है, मेरा सर बाबा,

तरस तो खा लो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी.......

तुम्ही आसरा हो, तुम्ही आस हो,

तुम्ही बालाजी मेरा, विशवास हो,

सुन लो दुहाई मेरी,

थाम लो कलाई मेरी,

विनती ना टालो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

तरस तो खा लो, हे बालाजी.......

है सौगंध तुमको, प्रभु राम की,

दो सेवा मुझे, सालासर धाम की,

पड़ा हूँ मैं पाँव में, करुणा की छाँव में,

मुझको बिठा लो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

तरस तो खा लो, हे बालाजी.......

मुझे मेरी भक्ति का, फल चाहिए,

अभयदान ज्ञान और बल चाहिए,

आपका संदीप हूँ, आप के समीप हूँ,

गले लगा लो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

तरस तो खा लो, हे बालाजी.......

मुझको सम्भालो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी,

बड़ी दूर से आया हूँ, सालासर बाबा,

चरणों पर तुम्हारे है, मेरा सर बाबा,

तरस तो खा लो, हे बालाजी,

अपना बना लो, हे बालाजी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।