नाच रहे हैं मूषक समझो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

नाच रहे हैं मूषक समझो यही कहि है बाल गणेश,

अठखेली किलकारी करते मटक रहे हैं बाल गणेश,

ठुमक ठुमक चले बाल गणेश,

ठुमक ठुमक चले गणेश......

बोले पार्वती से विनायक,

मोदक खाने को मन ललचाए,

पार्वती ने दिए जो मोदक,

सब मूषक को बाट खिलाये,

फिर से माग रहे हैं मोदक,

जब कुछ भी बचा नही है शेष,

अठखेली किलकारी करते ,

मटक रहे हैं बाल गणेश,

नाच रहे हैं मूषक समझो ,

यही कहि है बाल गणेश,

ठुमक ठुमक चले गणेश,

ठुमक ठुमक चले गणेश.......

शकंरजी का त्रिशूल देखकर,

वोले इसे दे दो त्रिपुरारी,

लालट पर त्रिशूल बनाकर,

माँ ने बाल हठ की पूरी,

अद्भुत सुख पाती पार्वती,

जब बाल लीलाये करते गणेश,

अठखेली किलकारी करते मटक रहे हैं बाल गणेश,

नाच रहे हैं मूषक समझो यही कहि है बाल गणेश,

ठुमक ठुमक चले गणेश,

ठुमक ठुमक चले गणेश.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।