जय गुरुवर्म जय सुरिवर्म

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॥ पावन पाठ ॥

नंदनी खुदनी के नंदन, करते हम तुमको वन्दन,

नंदनी खुदनी के नंदन, करते हम तुमको वन्दन,

पचासवां दीक्षा दिवस है, हर्षित है गुरु भक्तो का मन.

जय गुरुवरम्म... जय गुरुवरम्म.....

जय सुरिवरमम्म.... जय सुरिवरमम्म......

जिन शासन की शान है, तप चारित्र महान है,

श्री जिन मनोज्ञ सुरि गुरुराज तो हम भक्तो के है भगवन,

जय गुरुवरम्म... जय गुरुवरम्म.....

जय सुरिवरमम्म.... जय सुरिवरमम्म......

हो खरतर गच्छ के दिव्य सितारे, स्वभाव है जिनका सरल,

वैराग्य के पथ पर बढ़ते जा रहै, प्रण है जिनका अटल,

श्री कांति सूरि जी के शिष्य प्यारे,

श्री प्रताप सागर के राज दुलारे,

संघ समाज के हित चिंतक बन,

करते है चिंतन हरदम,

जय गुरुवरम्म... जय गुरुवरम्म.....

जय सुरिवरमम्म.... जय सुरिवरमम्म......

ब्रहमसर तीर्थ के है उधारक, नागेंद्र तीर्थ के स्वप्न द्रस्ठा,

कई मंदिर जीर्णोद्धार कराये, कराई प्रभु की प्रतिस्ठा,

संघ एकता का बिगुल बजाया,

कई संघो का मतभेद मिटाया,

ऐसे उपकारी गुरुवर को आओ करे वन्दन,

जय गुरुवरम्म... जय गुरुवरम्म.....

जय सुरिवरमम्म.... जय सुरिवरमम्म......

हो ..पचासवें दीक्षा दिवस की, बधाई बारम्बार,

त्यागी वैरागी गुरुवर, जिन शासन सिणगार,

श्री जिन मनोज्ञ सूरि गुरुराज हमारी बधाई करो स्वीकार,

लख लख देता बधाई "दिलबर" गुरु भक्त परिवार,

जय गुरुवरम्म... जय गुरुवरम्म.....

जय सुरिवरमम्म.... जय सुरिवरमम्म......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।