बाबोसा भगवान का ये दरबार है

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॥ पावन पाठ ॥

बाबोसा भगवान का ये दरबार है,

हो बाबा तेरे ही भरोसे, मेरा परिवार है,

श्री बाबोसा भगवान....

चाहे डुबोदे, चाहे तिरादे, मेरे जीवन की नैय्या,

तेरे हाथ मेरी पतवार, बाबोसा ही खिवैया,

मेरी कस्ती पड़ी बीच मझधार है,

हो बाबा तेरे ही भरोसे.....

तेरी कृपा मिल जाये हमको, करदो ऐसी महर,

फिर ना कोई चिंता हमको, ना ही कोई फिकर,

इतना सा करदो हमपे उपकार है,

हो बाबा तेरे ही भरोसे.....

भक्त तुम्हारे द्वार खड़े है करदो वारे न्यारे,

माँ छगनी के नंदन हरपल हमतो तुम्हे पुकारे,

"दिलबर" की छोटी सी दरकार है,

हो बाबा तेरे ही भरोसे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।