रातो रात मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रातो रात मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया,

गोटेदार मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया....

यह चुनरिया भोले बाबा ने मंगाई,

गौरा मैया ओढ़ के आई रे,

मेरी माँ की चुनरिया,

गोटेदार मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया....

यह चुनरिया राम जी ने मंगाई,

सीता मैया ओढ़ के आई रे,

मेरी माँ की चुनरिया,

गोटेदार मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया....

यह चुनरिया श्याम जी ने मंगाई,

राधा मैया ओढ़ के आई रे,

मेरी माँ की चुनरिया,

गोटेदार मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया....

यह चुनरिया विष्णु जी ने मंगाई,

लक्ष्मी मैया ओढ़ के आई रे,

मेरी माँ की चुनरिया,

गोटेदार मंगाई रे मेरी माँ की चुनरिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।