करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है

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॥ पावन पाठ ॥

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है....

बना एक कांच का मंदिर उसी में भगवान रहते हैं,

लिए हैं पेन और कागज सभी की तकदीर लिखते हैं,

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है.....

लड़कपन खेल में खोया जवानी नींद भर सोया,

बुढ़ापा देखकर रोया उसी घर सबको जाना है,

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है......

वो टूटी आम से डाली रोया बाग़ का माली,

बगीचा हो गया खाली उसी घर सबको जाना है,

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है......

पलंग के चार हैं पाए विधाता लेने को आए,

खुशी से लेे चलो भाई रोएंगे बहन और भाई,

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।