हे नाथ नारायण वासुदेवा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी

हे नाथ नारायण वासुदेवा

भक्तो को तारा तो क्या तुम ने तारा,

रो रो के कहता है ह्रदय हमारा

जब जणू सब पाप हर लो हमारे

हे नाथ नारायण वासुदेवा

कहते हैं लोग तुम्हे दिनों का स्वामी

सुनते नहीं नाथ मेरी कहानी

अब तो दया कीजिए नाथ प्यारे

हे नाथ नारायण वसु देवा

लाखो की तमने है बिगड़ी बनाई

अब तो तो प्रभु जी मेरी बरी आई

फिर भूल से याद कीजिए नाथ प्यारे

हे नाथ नारायण वासुदेवा

लाखो में ढूंढा न पाया सहारा

अब तो तेरे दर पे पल्ला पसारा

खली न जाए तेरे दर से प्यारे

हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।