सागर सै भी गहरा

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॥ पावन पाठ ॥

सागर से भी गेहरा बन्दे गुरु देव का प्यार है,

देख लगा कर गोटा इसमें तेरा बेडा पार है ,

भाव सागार में एक दिन तेरी जीवन नैया धोलेगी,

खेते खेते एक दिन तो पतवार भी तेरी धोलेगी,

जाये गा उस पार तू कैसे चारो तरफ अंधकार है,

सागर से भी गेहरा बन्दे गुरु देव का प्यार है,

सोपत नैया गुरु देव को वोही पार लगये गे,

पैर पकड़ ले गुरु देव के सोया भाग जगाये गे,

पापी से पापी हो चाहे करते नही इंकार है ,

सागर से भी गेहरा बन्दे गुरु देव का प्यार है,

संत समागम हरी कथा भी गुरु किरपा से पाओ गे ,

घर आयेगे नारायण जब उनका ध्यान लगाओ गये,

बिना सतगुरु के बंदे तेरा ये जीना ही बेकार है,

सागर से भी गेहरा बन्दे गुरु देव का प्यार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।