मेरी मां दा नजारा एक पासे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सारे जग दिया खुशियां एक पासे, मेरी मां दा नजारा एक पासे,

की दशा मेरे दिल विच वस जाए, मेरी मां दा नजारा पासे.....

यह प्रीत जो छुपाया चुपदी नाचुप, कर गल इह झुपदी ना,

कदी रो आवड़ मुड़ हासेमाँ, दा प्रेम इशारा एक पासे,

सारे जग दिया खुशियां एक पासे, मेरी मां दा नजारा एक पासे......

मेरे दिल विच प्रीत उस दी है, हर पसे माँ मेनू दिसदी हैं,

लक्खा जग दिया प्रीतां एक पासे, मेरी मां दा प्रेम हुलारा एक पासे,

सारे जग दिया खुशियां एक पासे, मेरी मां दा नजारा एक पासे......

मैं माँ दा हां मां मेरी है, बिन माँ दे घोर अंधेरी है,

कई चन्न ते सूरज एक पासे, मेरी मां दा चमकारा एक पासे,

सारे जग दिया खुशियां एक पासे, मेरी मां दा नजारा एक पासे.....

ज्योति ज्ञान दी मन विच जगदी है, वही प्रेम की गंगा वगदी है,

कई सागर नदियां एक पासे, बाणगंगा दी धारा एक पासे,

सारे जग दिया खुशियां एक पासे, मेरी मां दा नजारा एक पासे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।