पकड़ लो बाँह अब मईया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी,

पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी,

हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी,

पकड़ लो बाँह अब मईया......

तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठा हूँ,

तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठा हूँ,

जमाने की तरफ देखो मुझे कैसे निभाओगे,

जमाने की तरफ देखो मुझे कैसे निभाओगे,

पकड़ लो बाँह अब मईया......

पड़ी मझदार में नैया खिवईया कोई नही अपना,

पड़ी मझदार में नैया खिवईया कोई नही अपना,

खिवईया आप बनो तो नैया हो मेरी पार जाएगी,

पकड़ लो बाँह अब मईया......

लदी है पाप की गठड़ी हमारे शीश के ऊपर,

लदी है पाप की गठड़ी हमारे शीश के ऊपर,

वजन पापों का भारी है उसी से डूब जाएगी,

पकड़ लो बाँह अब मईया......

सकल जग ढूंढ कर हारे पता पाया नही तेरा,

सकल जग ढूंढ कर हारे पता पाया नही तेरा,

ह्रदय में आप बस जाओ छवि मन में समाएगी,

पकड़ लो बाँह अब मईया.....

पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी,

हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी,

तुम्हारी लाज जाएगी तुम्हारी लाज जाएगी,

तुम्हारी लाज जाएगी तुम्हारी लाज जाएगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।