करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ,

सुनलो बिनती हमारी,

मेरी माँ चली आओ, मेरी माँ चली आओ,

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ.....

बड़ी ही मुसिबतों वाली काली घटा छाई है,

काली घटा छाई है, काली घटा छाई है,

हर तरफ दुखों ने माँ ली अंगड़ाई है,

ली अंगड़ाई है, ली अंगड़ाई है,

हिम्मत गई है हार मेरी माँ चली आओ,

सुनलो बिनती हमारी,

मेरी माँ चली आओ, मेरी माँ चली आओ,

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ.....

सोचा था ना हमने कभी ऐसे दिन आएंगे,

ऐसे दिन आएंगे, ऐसे दिन आएंगे,

तेरे बिन शेरोंवाली कैसे रह पाएंगे,

कैसे रह पाएंगे, कैसे रह पाएंगे,

आ गई विपदा भारी मेरी माँ चली आओ,

सुनलो बिनती हमारी,

मेरी माँ चली आओ, मेरी माँ चली आओ,

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ.....

इस बन्धन से हमे मुक्त कराओ माँ,

मुक्त कराओ माँ, मुक्त कराओ माँ,

इस महामारी को तो मार भगाओ माँ,

मार भगाओ माँ, मार भगाओ माँ,

कहते दर के भिखारी मेरी माँ चली आओ,

सुनलो बिनती हमारी,

मेरी माँ चली आओ, मेरी माँ चली आओ,

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ.....

भगतो की अर्जी अब करो स्वीकार माँ,

करो स्वीकार माँ, करो स्वीकार माँ,

बच्चों को अपने माँ तो देदे थोड़ा प्यार माँ,

देदे थोड़ा प्यार माँ, देदे थोड़ा प्यार माँ,

तू है सबकी प्यारी मेरी माँ चली आओ,

सुनलो बिनती हमारी,

मेरी माँ चली आओ, मेरी माँ चली आओ,

करके शेर सवारी मेरी माँ चली आओ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।