तू ऐसी वर दाती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है,

तेरी महिमा ब्रहमा विष्णु,

तेरी महिमा ब्रहमा विष्णु से भी कही ना जाती है ,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है......

तेरे एक इशारे से माँ सृष्टि का विस्तार हुआ,

जीव जन्तु मनुष्य देवता ये तेरा परिवार हुआ,

खिले वनस्पतियां बसंत जब,

खिले वनस्पतियां बसंत जब,

तू मईया मुस्काती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है.....

सूरज चन्दा नैन दो तेरे जो जग को रस्ता दिखलाये,

चार कोने और चार दिशाएं ये है तेरी आठ भुजाएं,

तेरे मस्तक की त्यूड़ी से,

तेरे मस्तक की त्यूड़ी से,

जग में प्रलय आ जाती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है.....

दिन है सुहा चोला तेरा रात चुनरिया काली है,

तारे इसमे जड़े सितारे शोभा अजब निराली है,

शीश तेरा आकाश है माता,

शीश तेरा आकाश है माता,

धरती तेरी छाती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है.....

जल वायु अग्नि पाँचो तत्वों पर अधिकार तेरा,

शीर समुन्द्र में बैठा है विष्णु पहरेदार तेरा,

उस सागर से भर भर कर माँ,

उस सागर से भर भर कर माँ,

जग को दूध पिलाती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है.....

तू ही अम्बे तू जगदम्बे तू शक्ति महामाया है,

तू जगजननी पार्वती माँ तेरा अन्त ना पाया है,

तू काली कलकत्ते वाली,

तू काली कलकत्ते वाली,

चण्डी भी कहलाती है,

तू ऐसी वर दाती है, ऐसी वर दाती है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।