आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आंवागे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे,

पांवागे पावांगे मुँहो मंगीया मुरादा पांवागें.....

बाल बच्चे विच सुख बरसा दे,

दूध पूत दी प्यास मिटा दे,

पूरे करी सवाल दाती तेरे आंवागे,

आंवागे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे.....

माँवा हुँदीयां ठण्डीया छाँवा,

पुत्र भुलण नही भुलदीया माँवा,

साडा करी ख्याल दाती तेरे आंवागे,

आंवागे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे.....

ईको चीज दी लोड़ है दाती,

होर ना कोई थोड़ है दाती,

जे तू बक्शे बाल दाती तेरे आवांगे,

आंवागे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे.....

कन्या पूजन यज्ञ कराईये,

धर्म अरख विच माया लाईऐ,

खुला देयो धनवान दाती तेरे आवांगे,

आवांगे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे......

धर्म शर्म शुभ कर्म सिखा दे,

बच्चे साडे पास करा दे,

लै लड्डूआ दा थाल दाती तेरे आवांगे,

आंवागे आंवागे हर साल दाती तेरे आंवागे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।