शेरावाली की लगालो जय जयकार भक्तों

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां सांसें भी देती उधार भक्तों,

शेरावाली की लगालो जय जयकार भक्तों.....

जय जय दुर्गा जय मां काली, जय जय अम्बे महारानी,

अर्धकुमारी कालरात्रि, जय जय मां ज्वालारानी,

तोड़ा अकबर का मां ने गुमान भक्तों,

शेरावाली की लगालो जय जयकार भक्तों.....

सच्ची ज्योति भवन निराला, नमन तुम्हे कटरेवाली,

झंडे लेके आए भक्त, प्रणाम तुम्हे झंडेवाली,

लांगुर भैरव है मां के दरवान भक्तों,

शेरावाली की लगालो जय जयकार भक्तों.....

यश-कीर्ति और भक्ति-वैभव, तेरी कृपा से आता है,

करता जो तेरा सुमिरण, वो भवसागर तर जाता है,

लिखी महिमा “शुभम” ने महान भक्तों,

गाए महिमा “प्रमोद” है गुलाम भक्तों,

शेरावाली की लगालो जय जयकार भक्तों....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।