करदो नज़रें करम काली माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ की महिमा है भली, हरती दुख संताप,

भक्तों की मुश्किल हरे, स्वयं काटती पाप…

करदो नज़रें करम काली माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ,

मेरी माँ

करदो नज़रें करम काली माँ.....

आएं दर पे सवाली मेरी माँ,

हो निगाहें करम मेरी माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ....

जय काली कलकत्ते वाली, भक्तों को माँ तारने वाली,

चुन चुन के असुरों को मारे, वार तेरा ना जाए खाली,

ओ भरदो झोली खाली मेरी माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ,

मेरी माँ.....

गले सजे मुण्डो की माला, चण्डी माँ का रूप निराला,

इक हाथ त्रिशूल लिया है, दूजे से खप्पर भर डाला,

ओ नयनों में तेरे लाली माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ,

मेरी माँ.....

क्रोध में माँ का रूप भयंकर, चरणों में माँ के शिव शंकर,

100 सिंहो से तू बलशाली, कृपामयी है दुर्गा काली,

हो “शुभम” पर रहम मेरी माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ,

मेरी माँ....

आएं दर पे सवाली मेरी माँ,

हो निगाहें करम मेरी माँ,

करदो नज़रें करम काली माँ,

मेरी माँ

करदो नज़रें करम काली माँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।