बाबा का दरबार लगे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार,

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार.....

बालाजी की जोत जगै सै,

कटते रोग पुराणे री,

कटते रोग पुराणे री,

एक दरखास लगे चरणां में,

पल में बाबा आणे री,

पल में बाबा आणे री,

पल में रोग कटै सै री,

मंगल और शनिवार,

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार.....

छोटे छोटे दो लाडू,

खाए तै पेशी आवे सै,

खाए त पेशी आवे सै,

मार मार क सोटे बाबा,

घेर जोत पे ल्यावे सै,

घेर जोत पे ल्यावे सै,

ओपरा नहीं डटै सै री,

मंगल और शनिवार,

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार.....

दरबारा जोत जगे सै,

पहरे पै हनुमान खड़े,

पहरे पै हनुमान खड़े,

धरया लंगोटा बालाजी का,

दिखे सै भगवान खड़े,

दिखे सै भगवान खड़े,

सोये भाग जगैं सं री,

मंगल और शनिवार,

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार.....

बाले भक्त जोत पै बैठे,

सिर प हाथ मुरारी का,

सिर प हाथ मुरारी का,

महराणे में झंडा गड रह्या,

बाबा संकटहारी का,

बाबा संकटहारी का,

गुहणिया राम रटै सै री,

मंगल और शनिवार,

बाबा का दरबार लगै सै री,

मंगल और शनिवार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।