सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये,

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये,

दिक्खी जायां हाल मेरा, गुफा बाहर आणियै- आणियै,

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये.....

छप्पा- गुजा तेरे कशा कक्ख नियों दातिये,

माऊ कोला बचड़ा ते, बक्ख नियों दातिये,

कैसी मायें मेरिये तू, लड़ छड़कानी ऐ,

दिक्खी जायां हाल मेरा, गुफा बाहर आणियै- आणियै

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये......

न्हेरी बत्ता ज्योत कोई, बाल जोते आहलिये,

पुरा कर मेरा भी, सवाल ज्योतावलिये,

मनै आली गल्ल मैं ते तुगी गै सनानी ए,

दिक्खी जायां हाल मेरा, गुफा बाहर आणियै- आणियै,

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये.....

तेरे बिन कौड़ी मेरा, नियों मुल्ल दातिये,

बक्शेआं मीं हर इक्क, मेरी भुल्ल दातिये,

मेरे जेहे मूर्खे नू, कैसी तरसानी ऐ,

दिक्खी जायां हाल मेरा, गुफा बाहर आणियै- आणियै,

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये.....

लक्ष्मी ते सरस्वती, काली माता वैष्णो,

खुश आं मैं रक्खो, जिथे चाली माता वैष्णो,

हर हालें मैंहमां, तेरी भगते माँ गानी ऐ,

दिक्खी जायां हाल मेरा, गुफा बाहर आणियै- आणियै,

सन्हाकडे सिहांसने पे बैठी महारानीये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।