दिन गए ने नवरात्रे दे आ साणु वि चिठ्ठी पायी दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिन गये ने नवराते दे आ सहनु वी चिठ्ठी पाई दातिये,

दिन पुछदे लमे लमे साह तारिक छोटी पाई दातिये,

दूरो दूरो तेरे दर भगता ने औना है,

अमृत वेले उठ दर्शन पौना है,

सड्डा होर न सबर अजमा,

देर न तू ली दातिये,

दिन पुछदे लमे लमे ........

आंदे जांदे भगत ता उच्ची भेटा गौणगे,

बस ते ट्रैक लोकी सेकला ते औंगे,

नंगे नंगे पैरी जाना असी आ गरीबा नु भुलाई दातिये,

दिन गये ने नवराते दे........

करके माँ धतोक पौंच जाइये विच मन्दिरा,

किते ने झुकाए शीश वाडिया सिकंदरा,

बड़ा कर तेनु दीद वाला चा किते भूल न जाई दातिये,

दिन गये ने नवराते दे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।