तेरा विछोड़ा दातीऐ हुण मेरे तो सहा ना जाऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा विछोड़ा दातीऐ हुण मेरे तो सहा ना जाऐ,

आप ते बैठी भवन ते मैनु राती नींद ना आवे,

तेरा विछोड़ा दातीऐ.....

बिना तेरे बिना तेरे कोई वी थां नही,

कोई वी थां नही,

या कह दे तू या कह दे के तू मेरी माँ नही,

के तू मेरी माँ नही,

दुनिया दे अगे जोर नही माँ तेरे सिवा कोई होर नही,

दस केड़ा लाड लडावे,

आप ते बैठी भवन ते मैनु राती नींद ना आवे,

तेरा विछोड़ा दातीऐ....

मै उठ ऊठ के माँ वेखा बारियां, माँ वेखा बारियां,

मै रो रो के अँखां हारिया, माँ अँखां हारिया,

मै बेबस इनां हो गया तेरी याद दे विच खो गया,

पर तू ना दर्श दिखाये,

आप ते बैठी भवन ते मैनु राती नींद ना आवे,

तेरा विछोड़ा दातीऐ....

मै पाईया ने मै पाईया ने तैनु कई तेनु चिट्ठियां,

तैनु कई तेनु चिट्ठियां,

मै लिखिया ने मै लिखिया ने गल्लां कई मिट्ठियां,

गल्लां कई मिट्ठियां,

तू ते सब दे दिला दीयां जाने,

हुण आजा किसे बहाने,

मैंनु तेरी याद सतावे,

आप ते बैठी भवन ते मैनु राती नींद ना आवे,

तेरा विछोड़ा दातीऐ....

तू आ जांवे तू आ जांवे मेरी है आस माँ,

मेरी है आस माँ,

मिट जाये मिट जावे जन्मा दी प्यास माँ,

जन्मा दी प्यास माँ,

दुनिया दी तू रखवाली ऐ तूहीओ वैष्णो तूहीओ काली ऐ,

तेरा भेद कोई ना पावे,

आप ते बैठी भवन ते मैनु राती नींद ना आवे,

तेरा विछोड़ा दातीऐ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।