श्री बाबोसा का सपना मैं देखु

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॥ पावन पाठ ॥

रु..... रु... रु....

आजा री प्यारी निंदिया आजा तू,

नयनो में आके समा जा तू,

श्री बाबोसा का सपना मैं देखु,

रु..... रु... रु....

जल्दी आजा, निंदिया रानी, सपना मेरा साकार हो,

छगनी के नंदन, श्री बाबोसा भगवन,

मुझको तेरा दीदार हो,

नयनो में आके समाजा तू,

रु..... रु... रु....

रात ढली अब, आजा री निंदिया, तुझको बुलाये अखियाँ,

क्यो तड़फाये, मोहे समझ न आये, बीत न जाये रतियाँ,

हो न जाये प्रभात रे,

रु..... रु... रु....

अँखियों पर हो, पहरा तेरा, हो जीवन मे सवेरा,

सपना संजोता," दिलबर " जो तेरा, ख्वाब रहे न अधूरा,

रु..... रु... रु....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।