तेरे सहारे थे दादी जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरे सहारे थे दादी जी, तेरे सहारे हैं, तेरे सहारे ही रहेंगे औ मेरी मैया,

तेरे हवाले थे दादी जी, तेरे हवाले हैं, तेरे हवाले ही रहेंगे औ मेरी मैया....

चरण कमल की सेवा देदो, नित उठ भवन बुहारूं,

प्रेम पूरित नयनो से तेरी निर्मल छवि को निहारूँ,

भक्ति का वरदान दे दो, ओ मेरी मैया.....

तेरे सिवा मेरी झुंझुनुवाली कोई नही है हमारो,

दर दर की है ठोकर खाई मिलो न कोई सहारो,

अब तो आकर बांह पकड़ लो, ओ मेरी मैया.....

दुनियां के सब रिश्ते नाते माया का है डेरा,

एक तू ही लागे अपनी सर पे हाथ जो फेरा,

भवसागर से पार लगादो, ओ मेरी मैया.....

जन्म मरण के फेरों में दादी नैया डगमग डोले,

होता निश्चय भवपार वही जो जय दादी की बोले,

करे यही अरदास "गम्भीर", ओ मेरी मैया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।