तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ मेरा कोई ना जग मे तेरे सिवा,

मुझे खाली ना दर से मोड़ो माँ मेरा कोई ना जग मे तेरे सिवा,

तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ.....

मुझे आस थी जिन नातो से वो एक एक करके चले गये,

मैने फूलो से जिनकी भरदी डगर वो कांटों से भरके चले गये,

अब तुम तो ना मुझे छोड़ो माँ मेरा कोई नही जग में तेरे सिवा,

तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ.....

तू कड़वे नीम के पत्तों में है शहद अनोखा भर देती,

तेरा तीनों लोको में राज है माँ तू रकों को राजा कर देती,

अब मेरा यू ना दिल तोड़ा माँ मेरा कोई नहीं जग में तेरे सिवा,

तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ.....

तेरी दया का दीपक जलते ही तूफान में दीपक जग जाएगा,

तेरा जरा सा हाथ हिलाने से मेरा बेड़ा किनारे लग जाएगा,

मेरी आशा का दर्पण जोड़ो माँ मेरा कोई नही जग तेरे सिवा,

तेरी आँखो के तारेे करोड़ो माँ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।