तेरी ज्योत निराली है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जिस घर के आंगन में, तेरी ज्योत निराली है,

हर रोज वहां होली, हर रात दिवाली है,

जिस घर के आंगन मे, तेरी ज्योत निराली है....

जिस घर मे ऐ मैया, तेरा नाम चहकता है,

उस घर का हर कोना, खुशियों से महकता है,

उस घर पे मेहर करती,

उस घर पे मेहर करती, मेरी माँ मेहरवाली है,

जिस घर के आंगन मे, तेरी ज्योत निराली है.....

दारिद्र भाग जाते, दुख भागे डर कर के,

उस घर मे नही आते, दुख कभी भूलकर के,

शेरो पे जहाँ रहती, मेरी माँ शेरांवाली है,

जिस घर के आंगन मे, तेरी ज्योत निराली है....

कैसे भी अँधेरे हो, ये ज्योत मिटाती है,

विश्वास जो करते है, उन्हें राह दिखाती है,

पावन ज्योति माँ की, जिसने भी जगाली है,

जिस घर के आंगन मे, तेरी ज्योत निराली है....

‘बेधड़क’ कहे ‘लख्खा’, ममता के चुन मोती,

घर मंदिर हो जाये, श्रद्धा से जाग ज्योति,

खुशियो से भरेगी माँ, जो तेरी झोली खाली है,

जिस घर के आंगन मे, तेरी ज्योत निराली है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।