आजा रे ओ मेरे गिरधर आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजा रे, ओ,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा.....

दिल में मेरे, एक भरोसा,

आस ये साँची लागे रै,

कस्तूरी तू मन मृग मेरा,

तेरे पीछे भागे,

आजा रे, ओ,

आजा रे ओ,

आजा रे मेरे बाबा आजा,

साँची राह बता जा रे,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा......

कितना कैसे, कब मैं रोया,

जाने बिना बताए,

एक भरोषा तुझ पे बाबा,

लाज ना मेरी जाए,

आजा रे ओ,

आजा रे ओ मेरे केशव आजा,

सर पर हाथ फिरा जा रे,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा......

मैं निर्बल तू, मेरा सहारा,

तुझ पे ही इतराउ,

कैसे सुनता है तू मेरी,

क्यों ये सब को जताऊ,

आजा रे ओ मेरे माधव आजा,

दुनिया को दिखला जा रे,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा.....

जैसी करनी, वैसी भरनी,

गीता ज्ञान पठाया,

मंगल तेरा मैं हूँ रक्षक,

तू काहे घबराया,

आजा रे ओ,

आजा ओ आजा रे मेरे,

सेवक आजा,

अपनी आस पुगा जा रे,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा......

आजा रे, ओ,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा,

आजा मेरे गिरधर आजा,

मेरे गिरधर आजा,

आकर प्रीत निभा जा रे,

ओ बाबा, बाबा, बाबा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।