थारी सूरत बाबा साँवली

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ अखिया कामण गारी,

सुरमा की रे किनारी,

कानां सोहवे बाली,

कजरा बंसी प्यारी,

हरिये चितवन हिवड़े भागी,

श्याम जी,

थारे सूं प्रीतड़ली लागी,

श्याम जी,

थारी सूरत बाबा साँवली,

नैणा ने कर गई बावली,

नींदड़ली खो गई म्हार ली,

रे घूमं, घूमं, घूमं, घूमं, घूमं,

थारी सूरत बाबा साँवली,

नैणा ने कर गई बावली,

नींदड़ली हो गई भारडली,

रे घूमं, घूमं, घूमं, घूमं, घूमं......

मैं तो मिजाजी थारे, लारे फिरां,

निजरा मिलाओ म्हासूं, म्हारा सांवरा,

निजरां सूं निजरा की कर ल्यो,

बातड़ी,

म्हारे मिलाओ निजरा,

बस एक स्यात ही,

थारी सूरत बाबा साँवली,

नैणा ने कर गई बावळी,

नींदड़ली हो गई म्हारडली,

रे घूमं, घूमं, घूमं, घूमं, घूमं.....

म्हा सो दीवानो बाबा,

पावोगा नहीं,

हाथां लेके दीवलों,

ढूंढ ल्यो कहीं,

चाक राखी मत ना परखो,

चाकरी,

शाम सवेरे थारी बजावां हाज़िरी,

थारी सूरत बाबा साँवली,

नैणा ने कर गई बावली,

नींदड़ली हो गई म्हारडली,

रे घूमं, घूमं, घूमं, घूमं, घूमं.....

आओ बाबा जी,

कदे बण पांवणा,

रस्ता बिछा द्यूं थारे,

पलक पावड़ा,

बात मानों अब तो बाबा,

म्हारली,

गोलू थारी करसी चोखी,

चाकरी,

थारी सूरत बाबा साँवली,

नैणा ने कर गई बावली,

नींदड़ली हो गई म्हारडली,

रे घूमं, घूमं, घूमं, घूमं, घूमं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।