ढोलकी वजदी विच सत्संग दे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन कृष्ण भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ढोलकी वजदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे....

व्हिच सत्संग दे गणपति आए,

रिद्धि सिद्धि नाल ले आए,

रिद्धि सिद्धि नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे....

विच सत्संग दे राम जी आए,

सीता मैया ना ले आए,

सीता माता नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे....

विच सत्संग दे कृष्ण ने जी आए ,

राधा रानी ना ले आए,

राधा रानी नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे....

विच सत्संग दे भोला जी आए,

गौरा मैया नाल ले आए,

गोरा मैया नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी व्हिच सत्संग दे....

विच सत्संग दे विष्णु जी आए,

लक्ष्मी मैया नाल ले आए,

लक्ष्मी मैया नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी विच सत्संग दे....

विच सत्संग दे सतगुरु जी आए,

सारी संगत नाल ले आए,

संगत सारी नचदी विच सत्संग दे,

किन्नी सोनी लगदी व्हिच सत्संग दे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।