करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

झूमों भक्तों नाचो भक्तों, झूमों भक्तों नाचो भक्तों,

हो रही जय जयकार मैयारानी के, मैया शेरोंवाली के,

झूमों भक्तों नाचो भक्तों, हो रही जय जयकार शेरोंवाली के,

मैया शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के.....

दाती का जगराता जय हो, आ गई मेरी माता जय हो,

दाती का जगराता जय हो, आ गई मेरी माता जय हो,

हो मंदिर मन को भाता जय हो, भवनों से माॅं आई देखो,

भवनों से माॅं आई देखो, हो के शेर सवार शेरोंवाली के,

मैया शेरोंवाली के,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के.....

भक्तों ने है यग्न रचाया, माँ की महिमा गा लो,

माँ की महिमा गा लो, हो दर्शन करलो महारानी के,

जीवन सफल बना लो, दुख को हरती दात्ती जय हो,

झोलियाँ भरती दात्ती जय हो, कृपा करती दात्ती जय हो,

हो माँ की कृपा से होता है, सबका बेड़ा पार शेरोंवाली के,

मैया शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

हो रही जय जयकार शेरोंवाली के....

रात नसीबों वाली है, आई शेरोंवाली है,

आई शेरोंवाली है..

मैं गाऊँ तुम नाचो भक्तों, सब बजाओ ताली,

सब बजाओ ताली, बड़े दिनों के बाद है आई,

रात ये खुशियों वाली, माँ के रंग निराले जय हो,

देखे किस्मतवालें जय हो, जो है भोले-भाले जय हो,

धरती नाचे अम्बर नाचे, जो करे जयकार शेरोंवाली के,

मैया शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के....

तारा रुक्मण बनके नाचो, मन हो जाऐ मतवाला,

मन हो जाऐ मतवाला, मस्ती में है भेंटे गाता,

दास है किस्मतवाला, मैया शेरोंवाली जय हो,

मैया मेहरोंवाली जय हो, ऊँचे डेरोंवाली जय हो,

आज मेरी मैया ने भरने, है सबके भण्डार शेरोंवाली ने,

मैया शेरोंवाली ने, मैया शेरोंवाली ने,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के...

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

करलो दर्श दीदार शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के,

झूमों भक्तों नाचो भक्तों, झूमों भक्तों नाचो भक्तों,

हो रही जय जयकार मैयारानी के, मैया शेरोंवाली के,

झूमों भक्तों नाचो भक्तों, हो रही जय जयकार शेरोंवाली के,

मैया शेरोंवाली के, मैया शेरोंवाली के....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।