तेरे दर पर आ कर जाना क्या है तेरी माया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पर आ कर जाना क्या है तेरी माया,

तेरे दर पर आ कर जाना क्या है तेरी माया,

तेरी महिमा अपरम्पार है मै ये समझ ना पाया,

तेरे दर पर आ कर जाना....

इस दुनिया की मोह माया में, मैं फसा हुआ ईक बन्दा हूँ,

तेरी याद नही आई अब तक, मैं खुद से ही शर्मिन्दा हूँ,

मुझे दर पे बुला कर मेरा जीवन सफल बनाया,

तेरे दर पर आ कर जाना......

तेरे दर्श की मन मे प्यास रहे, तेरे चरण कमल की आस रहे,

मुझ जैसे भूले भटकों को, हर दम तुझपे विश्वास रहे,

जो भी तेरे पे आया तूने गले लगाया,

तेरे दर पर आ कर जाना....

तेरे दर पर आ कर जाना क्या है तेरी माया,

तेरी महिमा अपरम्पार है मै ये समझ ना पाया,

तेरी महिमा अपरम्पार है मै ये समझ ना पाया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।