माँ शेरांवाली साडे नाल

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

खुशिया नचण साडे वेडे सुख ना फिर दे चार चवेरे,

लखा माँ अहसान है तेरे मैं गिनावां केड़े केड़े,

खुशिया नचण साडे वेडे सुख ना फिर दे चार चवेरे,

लखा माँ अहसान है तेरे मैं गिनावां केड़े केड़े,

माँ रखदी सदा ख्याल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ मेहरवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

खुशिया नचण साडे वेडे.....

हो शेरांवाली माँ दा पल्ला मैं जदो दा फड़ेया,

सौ खा के मैं आँखा मेरा कम कोई ना अड़ेया,

सौ खा के मैं आँखा मेरा कम कोई ना अड़ेया,

हो तारनहार नु बक्शन लगीया आप चढ़ाई गुड्डी,

मेहरावाली माँ मेरी ने कमी कोई ना छड्डी,

मेहरावाली माँ मेरी ने कमी कोई ना छड्डी,

दुख देंदी आप टाल के सानु कोई चिंता नही,

माँ मेहरवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

खुशिया नचण साडे वेडे......

हर बन्दे नु पई है चिंता की छोटी की भारी,

विच चिंता दे हर कोई फिरदा मत चिंता ने मारी,

विच चिंता दे हर कोई फिरदा मत चिंता ने मारी,

असा की लैणा माँ दे हुंदेया चिंता रोग बीमारी,

साडी ता शेरावाली माँ ने चिंता लै लई सारी,

साडी ता शेरावाली माँ ने चिंता लै लई सारी,

दिन लंगदे खुशियां नाल के सानु कोई चिंता नही,

माँ मेहरवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

खुशिया नचण साडे वेडे.....

लखा चिंता टल दी माँ ने आप मुकाईया,

शेरांवाली माँ दीया भक्तो ए सब ने वडयाईयां,

शेरांवाली माँ दीया भक्तो ए सब ने वडयाईयां,

सारे जग दी माँ नु चिंता की तेरी की मेरी,

जा जा के तू दस दे माँ नु तैनू चिंता केडी,

जा जा के तू दस दे माँ नु तैनू चिंता केडी,

फिर देखी हुंदे कमाल के सानु कोई चिंता नही,

माँ मेहरवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

खुशिया नचण साडे वेडे.....

खुशिया नचण साडे वेडे सुख ना फिर दे चार चवेरे,

लखा माँ अहसान है तेरे मैं गिनावां केड़े केड़े,

माँ रखदी सदा ख्याल के सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ शेरांवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही,

माँ मेहरवाली साडे नाल सानु कोई चिंता नही....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।