मेरी होली दुशेरा दिवाली

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरी होली दुशेरा दिवाली तेरी किरपा से है शेरावाली,

मेरे आंगन में ये खुशहाली तेरी किरपा से है शेरावाली,

माथे पे टिका गुलाल कहा लगाऊ,

लाल लाल चूड़ी ये चुनरिया चढू,

कनिया के रूप में आये तू माँ होली,

खेले मेरे परिवार के साथ होली,

मेरे हाथो में रंगों की थाली,

तेरी किरपा से है शेरावाली............

जब जब दशेरे का तोहर आये,

मैंने राम जी में दरस तेरे पाए,

आती है जब विजयदसमी की वेला,

घर मेरे लगता है खुशियों का मेला,

शाम आती रहे ये निराली,

तेरी किरपा से माँ शेरा वाली........

बन जाये लक्ष्मी तू धन बरसाए,

दीपावली का प्रब जब आये,

तू प्यार का दे के उपकार मैया,

भर जाती है मेरे भंगार मैया,

मेरी होती तिजोरी न खाली,

तेरी किरपा से माँ शेरा वाली........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।