माँ गले मे साजे मोतीयो की माला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

मोतीयो की माला से है,

मोतीयो की माला से है जग मे उजाला रे,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला....

अस्सी चार चौरासी मोतीयो की माला ये,

पहने चौरासी लाख जीवो की माला रे,

चौरासी माँ के भक्तों ने किये सुर माला रे,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला....

दर्शन दिखाया होगा खुद अम्बे रानी ने,

अमृत बरसाया होगा जगत कल्याणी ने,

हम सारे भक्तों ने कर्म कर डाला रे,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला....

सफेद है माला संग चोला लाल-लाल माँ,

मूरत है इतनी सुन्दर ऐसा रुप कमाल माँ,

माला के आगे फीका ओ चाँद का उजाला रे,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला....

राम ना डाल पाऐे ऐसी माला सीया को,

कृष्ण भी दे ना पाऐ राधा प्राण प्रिय को,

गौरा को ना डाली शिव ने ऐसी वर माला रे,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला....

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

माँ गले मे साजे मोतीयो की माला,

मोतीयो की माला से है,

मोतीयो की माला से है जग मे उजाला रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।