मेरे साई सावरिया आजा

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॥ पावन पाठ ॥

तन कफ़नी, सिर साफा साईं,

मोहक रूप सुहाना है,

झोळी में तेरी, ए बाबा,

सारे जग का खजाना है,

मेरी बिनती है बारम्बार, मेरी बिनती है बारम्बार,

मेरी सुन ले नाथ पुकार, मेरी सुन ले नाथ पुकार,

हे शिरडी के महाराजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा......

मेरा गुरु भी तू, मेरा ज्ञान भी तू,

मेरी भक्ति भी तू, भगवान भी तू,

मेरा गुरु भी तू, मेरा ज्ञान भी तू,

मेरी भक्ति भी तू, भगवान भी तू,

कण कण में जिसे महसूस करुँ,

वो करूँणा कृपा निधान भी तू,

मेरा गुरु भी तू, मेरा ज्ञान भी तू,

मेरी भक्ति भी तू, भगवान भी तू,

बागबान तू जिसका वो, दुनियाँ एक बग़ीचा है,

वो फूल कभी ना मुरझाया, जिस फूल को तुमने सींचा है,

मेरी बिनती है बारम्बार, मेरा मुरझाया गुलजार,

तू आकर जरा महका जा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा.......

मेरी आस भी तू, मेरी प्यास भी तू,

मेरी श्रद्धा भी तू, विश्वास भी तू,

मेरी आस भी तू, मेरी प्यास भी तू,

मेरी श्रद्धा भी तू, विश्वास भी तू,

पल पल जिसे खोज ही करूँ वो,

मंजिल मेरी तलाश भी तू,

मेरी आस भी तू, मेरी प्यास भी तू,

मेरी श्रद्धा भी तू, विश्वास भी तू,

सागर है तू दया का साईं,

अमृत सबको पिलाता है,

जो भी शरण में आये प्यासा,

उसकी प्यास बुझाता है,

मेरी बिनती है बारम्बार, मेरी बिनती है बारम्बार,

ले कर कृपा की धार, मेरी प्यास ही नाथ बुझा जा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा.......

मेरे मन में तू, मेरे तन में तू,

मेरे भजन में तू, मेरे सुमिरण में तू,

मेरे मन में तू, मेरे तन में तू,

मेरे भजन में तू, मेरे सुमिरण में तू,

जीवन में मेरे बस तू ही तू,

तेरी शरण सदा आशू,

शरणागत पर तूने, हमेशा अपनी कृपा बरसाई है,

बन के खिवैया जीवन नैया, भव से पार लगाईं है,

मेरी बिनती है बारम्बार, मेरी बिनती है बारम्बार,

मन माझी ले पतवार, हमें भव से पार लगा जा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरी बिनती है बारम्बार, मेरी बिनती है बारम्बार,

मेरी सुन ले नाथ पुकार, मेरी सुन ले नाथ पुकार,

हे शिरडी के महाराजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा,

मेरे साई सावरियाँ आजा, मेरे साई सावरियाँ आजा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।