सुबह शाम साईं आरती मैं तेरी गाऊँ

पारंपरिक
अन्य आरती साईं भजन aarti
॥ पावन पाठ ॥

हर पल तेरा दीदार साईं,

है यही ख्वाहिश शिर्डी मैं आऊँ,

है ये तमन्ना, बस यही ख्वाहिश, शिर्डी मैं आऊँ,

हर पल शिर्डी वाले तेरा दर्शन पाऊँ,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, मेरे साईं जी.....

सुबह शाम साईं आरती मैं तेरी गाऊँ,

है ये कामना मैं शिर्डी.. हर बार आऊं,

हरदम साईं नाम की मैं जोत जलाऊँ,

ऐसी रहमत सदा साईं तेरी मैं पाऊँ,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, मेरे साईं जी.....

साईं राम साईं राम साईं राम जी,

साईं श्याम साईं श्याम साईं श्याम जी,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी……

मैं सदा ही साईं तेरा गुणगान गाँऊं,

तेरे श्री चरणों में अपना शीश नवाऊँ……….

तेरी मूरत पे अपना मैं ध्यान लगाऊँ,

है ये कामना मैं शिर्डी… हर बार आऊं,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी……..

साईं राम साईं राम साईं राम जी,

साईं श्याम साईं श्याम साईं श्याम जी,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी….

तेरी भक्ति में साईं…. सदा डूब जाऊं,

तेरा दिव्य दर्शन… पाकर झूम जाऊं,

लीला तेरी सदा ही…. मैं सुनता जाऊं,

है ये कामना मैं शिर्डी… हर बार आऊं,

साईं जी… साईं जी… साईं जी… साईं जी.....

साईं राम साईं राम साईं राम जी,

साईं श्याम साईं श्याम साईं श्याम जी,

साईं जी, साईं जी, साईं जी, साईं जी….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।