तुमने ही तो रचा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तीनों लोकों में भोले,

तुम्हारी है सत्ता,

तुम्हारी मर्जी के बिना,

हिलता नहीं है पत्ता,

तुमने ही तो रचा है.....

चराचर जगत यह सारा,

सृष्टि समूल के,

हो तुम्हीं तो अधारा,

विनाश करने को,

पापियों का,

तुमने त्रिशूल धारा,

तुमने ही तो रचा है.....

गले भुजंग विराजे,

शशि शीश साजे,

त्रिपुण्डी तिलक तुमने,

भाल पे है धारा,

तुमने ही तो रचा है.....

तुम हो कैलाश वासी,

अजर अमर अविनाशी,

गूंजें चहूं ओर विश्व में,

हर हर शिव ओंकारा,

तुमने ही तो रचा है.....

श्रद्धा से जो शंकर,

कहे शरण में आ तुम्हारी,

महादेव भोले नाथ,

शिव शम्भू त्रिपुरारी,

भव सिंधु से उसको तारा,

जिसने लिया नाम तुम्हारा,

राजीव ने लिया नाम तुम्हारा,

तुमने ही तो रचा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।