गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है,

मेरे घर आओ गुरूदेव मैंने आप को बुलाया है....

गुरु मेरे ब्रम्हा है गुरु मेरे विष्णु है,

गुरु मेरे शिव भोले जिसने जगत रचाया है,

गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है.....

गुरु मेरी गंगा है गुरु मेरी जमुना है,

गुरु मेरी त्रिवेणी जिसने जगत नवाया है,

गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है....

गुरु मेरे चंदा है गुरु मेंरे तारा है,

गुरु मेरे सूरज किरन जिससे जगत उजियारा है,

गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है.....

गुरु मेरे माता पिता गुरु मेरे बंधू सखा,

गुरु मेरे सतगुरु है जिसने ज्ञान बताया है,

गुरूजी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है,

मेरे घर आओ गुरूदेव मैंने आप को बुलाया है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।