माँये नी सांनु रख लो सेवादार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

शाम सवेरे ज्योत जगा के,

शाम सवेरे ज्योत जगा के तेरा करां दीदार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार...

चाँदी दे गड़वी च गंगा जल पानी,

गंगा जल पानी मां गंगा जल पानी,

भर भर लैयावां हर रोज भवानी,

रोज भवानी हर रोज भवानी,

इतर छिड़क के पुष्पा दे नाल,

इतर छिड़क के पुष्पा दे नाल तेरा करा श्रृंगार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार...

तेरेयां रगां दे विच मस्त रवां मै,

मस्त रवां मै दाती मस्त रवां मै,

हर वेले मैया तेरा नाम जपां मै,

नाम जपां मै तेरा नाम जपां मै,

भुल जावे मैनू दुनिया सारी,

भुल जावे मैनू दुनिया सारी ऐसा कर उपकार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार......

बचड़े हां तेरे मैया गलतीयां करदे,

गलतीयां करदे मां गलतीयां करदे,

चरणां च डिगे सानु माफ मैया भरदे,

माफ मैया भरदे, माफ मैया भरदे,

बचड़े हां असीं तेरे दाती,

बचड़े हां असीं तेरे दाती ऐनां तां देदे प्यार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,

माँये नी सांनु रख लो सेवादार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।