द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही, श्याम तुम बिन हमारा सहारा नहीं,

लाज चली जाएगी ऐ विहारी मेरी नाथ दोगे जो हमको सहारा नहीं,

द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही....

भीष्म कर्णआदि गुरु द्रोण बैठे सभी पर कोई ख्याल हमपे तो करता नहीं,

मौन पांचो पति सर झुकाये हुए कह रहे जोर चलता हमारा नहीं,

द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही....

सूत की कोरी सारी मुरारी कहाँ जब कटारी लगी थी तेरे हाँथ में,

आगया वक्त आकर मदत कीजिये वरना कह दो जुबां हमने हारा नहीं,

द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही....

द्रोपदी की वचन सुन बचा लाज ली ऐसे ब्रजराज से बाबू दसरथ कहा,

मेरी पारी पे मोहन ना आओगे जो तो करूँगा मैं तुमको पुकारा नहीं,

द्रोपदी हो दुखारी पुकारी यही....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।