आरती दी ज्योत जगे

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आरती दी ज्योत जगे आईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

भक्त तेरे माँ लोड़ी मनांदे आस ने लांऊदे,

भक्ता दा मत्था टिकाई जाईयो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

शेर सवारी कर के आईजायो, अज रूप वैष्णो विच आईजायो,

भक्त करण अरजा तुसी सोहणे दर्शन दिखाई जाईयो,

फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

पिण्डी रूप वैष्णो रानी, पिण्डी माँ रूप भवानी,

जगमग जगमग ज्योत नूरानी,

तुसी ममता दे रूप विच आईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

थक चढ़ीये ऐ माँ मुँह कुमलाये, आस लाई माँ जगंल विच आये,

कुमलाये चेहरे हिलाईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

बच्चड़ा भेटां गाँदां रोदां, तेरे ख्याला विच जागदा सोदां,

तुसी भेंट सुनी के हौसला वधाई जाईयो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

आरती दी ज्योत जगे आईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो, फेर गुफा विच तुर जाईयो,

आरती दी ज्योत जगे आईजायो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।