हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

जीवन की दुख भरी कहानी,

जीवन की दुख भरी कहानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो.....

मन की सारी बात बता दो मैया से शर्माना कैसा,

शेरांवाली रूप वैध का उससे रोग छिपाना कैसा,

माँ के घर मे है प्रीत निभानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो.....

फल भी देती धन भी देती भक्तो को दर्शन भी देती,

भक्तो की वो हर ईक पीड़ा खुशीयों के वो क्षण भी देती,

घर मे खुशहाली है लानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो.....

जो चाहे वो मिल जायेगा मैया का दिल बहुत बड़ा है,

भाग्य विधाता भी माँ के दर झोली को फैलाके खड़ा है,

कोई नही मैया सा दानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो.....

चचंल ने मांगा मैया से तुम भी मांग के देख लो,

हमने शुक्र मनाया माँ का तुम भी मना के देख लो,

दूर करो अपनी परेशानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो.....

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

हाल पूछने आई भवानी अपनी अपनी कह डालो,

जीवन की दुख भरी कहानी,

जीवन की दुख भरी कहानी अपनी अपनी कह डालो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।