ज्योत जगे दिन रात

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

^ज्योत जगे,,,,, ज्योत जगे,,,,, ,

ज्योत जगे दिन रात, मईया जी तेरी ज्योत जगे ll

नूर, सदा तेरे भवन पे बरसे l

दर्शन, करने को मन तरसे l

सुनो, ज्वाला मात, मईया जी तेरी ज्योत जगे l

ज्योत जगे दिन रात, मईया जी तेरी ज्योत जगे ll

तेरी ज्योत, ज्वाला रानी, "तन मन शीतल, करे भवानी" l

भक्तों के सब, संकट हरदो, "करदो जी माँ, अम्बे करदो" ll

खुशियों, की बरसात, मईया जी तेरी ज्योत जगे l

ज्योत जगे दिन रात, मईया जी तेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

वोह अंबर के, चाँद सितारे, "किए ज्योत ने, रौशन सारे" l

जग में है, उजाला जिसका, "मैं भी दर्शन, कर लूँ उसका" ll

कब, होगी प्रभात, मईया जी तेरी ज्योत जगे l

ज्योत जगे दिन रात, मईया जी तेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

यह सारी ही, दुनियां फ़ानी, "तेरी ज्योत की, है दीवानी" l

बिना तेल और, बिना ही बाती, "ज्योत सदा, प्रचंड है दाती" ll

तेरी, क्या है बात, मईया जी तेरी ज्योत जगे l

ज्योत जगे दिन रात, मईया जी तेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।